भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है यहाँ की बहुत बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है गाँव की पहचान, हमारी संस्कृति, त्योहार ये सब कहीं न कहीं खेती से जुड़ा हुआ है लेकिन दुख की बात यह है कि जिस किसान के कारण हमारा पेट भरता है उस किसान की स्थिति आज भी काफी दयनीय बनी हुई है समाज मे भी उस तरह का सम्मान नहीं मिलता है सुबह से लेकर शाम तक किसान खेतों में मेहनत करता है धूप, बारिश, ठंड हर मौसम में वह काम करता है। फिर भी उसे उसकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता। कई बार फसल तैयार होने के बाद भी बाजार में कीमत इतनी कम मिलती है कि लागत भी नहीं निकलती। ऐसे में किसान कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं।कर्ज किसानों की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। बीज, खाद, दवाई और सिंचाई के लिए उन्हें पैसे उधार लेने पड़ते हैं। अगर फसल खराब हो जाए या सही कीमत न मिले, तो यह कर्ज बोझ बन जाता है। कई बार यही बोझ किसानों को गलत कदम उठाने पर मजबूर कर देता है, जो समाज के लिए बहुत दुखद है प्राकृतिक आपदाएँ भी किसानों की मुश्किलें बढ़ाती हैं कभी सूखा, कभी बाढ़,ये सब फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं मौसम का बदलता रूप भी खेती को अस्थिर बना रहा है। किसान पूरी मेहनत करता है, लेकिन मौसम की मार से उसकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं।सरकार की द्वारा कई योजनाएँ चलाई जाती है लेकिन उनका पूरा लाभ हर किसान तक नहीं पहुँच पाता जानकारी की कमी, भ्रष्टाचार और जटिल प्रक्रियाओं के कारण गरीब किसान अक्सर इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। छोटे किसानों के पास आज की तकनीक का अभाव जिसके कारण सही से खेती नहीं कर पाते हैं और उनके फसल बहुत कम उपजते हैंआज जरूरत है कि हम किसानों की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाएँ। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाए, कर्ज की समस्या को कम करे और योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाएं। साथ हीं, समाज को भी किसानों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वही हमारे जीवन का आधार है भारत भले हीं कृषि प्रधान देश है, लेकिन जब तक किसानों की स्थिति नहीं सुधरेगी, तब तक देश का सही विकास संभव नहीं है। किसान खुश रहेगा, तभी देश मजबूत बनेगा।