टीआरपी और एजेंडे की भेंट चढ़ी साख, जब आईना ही धुंधला हो जाए, तो समाज को सच कैसे दिखेगा
विशेष संपादकीय: पत्रकारिता समाज का चौथा स्तंभ है और यह समाज का आईना होती है- यह वह घिसा-पिटा जुमला है जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। लोग बड़े गर्व से कहते हैं कि समाज में जो कुछ भी घटित होता है, पत्रकारिता उसे बिना किसी मिलावट के हूबहू दिखा देती है। लेकिन आज…