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लालू यादव राजनेता से विवादों तक का सफर 

लालू यादव वैसे समय में बिहार के मुख्यमंत्री बने जब बिहार में केवल सत्ता परिवर्तन की राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की राजनीति होती थी उस समय बिहार में जाति के नाम पर शोषण, अत्याचार, भेदभाव, उच्च नीच, होता था उन्होंने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ा और दलित, पिछड़े और गरीबों को राजनीति में आवाज देने का काम किया वो जिस क्षेत्र में जाते थे उस क्षेत्र के लोगों के भाषा में हीं लोगों से बात करते थे जिसके कारण लोगों के बीच में बहुत लोकप्रिय हो गए उन्होंने आरक्षण की राजनीति को मजबूती दी जिसे सामाजिक बराबरी की दिशा में बड़ा कदम माना जाता है जब लालू यादव रेल मंत्री बने तब भारतीय रेलवे घाटे में चल रही थी उनके कार्यकाल में रेलवे ने मुनाफा कमाया जिसे उनकी एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिससे आम यात्रियों को राहत मिली और रेलवे की स्थिति बेहतर हुई। लेकिन इनके शासन काल के ऊपर कई भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे उनके शासनकाल को लोग अक्सर जंगल राज कहते हैं जहां कानूनी व्यवस्था कमजोर मानी गई हत्या, लुट, अपराध जैसी घटनाएं बढ़ी , शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में विकास नहीं हुआ , लालू यादव सबसे बड़ा विवाद में तब आए जब उनके ऊपर चारा घोटाला का आरोप लगा और वह दोषी पाए गए जिसके कारण उनके छवि का सबसे बड़ा नुकसान हुआ इनके ऊपर परिवारवाद का भी एक बहुत बड़ा आरोप लगता है क्योंकि उनके परिवार में बहुत सारे लोग राजनीति में हैं जिनकी अपनी कोई पहचान नहीं अपना कोई संघर्ष नहीं है आज भले ही समय बदल गया हो लेकिन लालू यादव का प्रभाव बिहार की राजनीति में अब भी बना हुआ है। उनके समर्थक उन्हें सामाजिक न्याय का प्रतीक मानते हैं, जबकि आलोचक उनके शासनकाल की कमियों को याद दिलाते हैं।लालू यादव का राजनीतिक सफर एक ऐसा सफर है जिसमें उपलब्धियां भी हैं और विवाद भी। उन्होंने समाज के एक बड़े वर्ग को आवाज दी, लेकिन साथ ही उनके ऊपर लगे आरोपों ने उनकी छवि को भी प्रभावित किया। यही कारण है कि वे भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित और जटिल नेताओं में से एक माने जाते हैं।

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