बिहार के भाइयों और बहनों, सबसे पहले तो आप सभी को बहुत-बहुत बधाई! अगर आप सोच रहे थे कि इस भीषण गर्मी में सिर्फ सूरज देवता ही आपका तेल निकाल रहे हैं, तो आप बिल्कुल गलत हैं। हमारी प्यारी तेल कंपनियों (OMCs) और सरकार ने मिलकर तय किया है कि जनता का ‘तेल’ किसी भी मौसम में कम नहीं होना चाहिए।
तभी तो, पिछले एक हफ्ते के अंदर दूसरा धमाकेदार सरप्राइज देते हुए पेट्रोल-डीजल के दामों में 90 पैसे प्रति लीटर का एक और ‘छोटा सा’ इजाफा कर दिया गया है। अब दिल्ली में पेट्रोल ₹98.64 और डीजल ₹91.58 हो गया है। लेकिन रुकिए, हम तो बिहार में रहते हैं ना? हमारे यहाँ तो टैक्स और ‘पवित्र’ वैट (VAT) का तड़का अलग से लगता है। तो आइए देखते हैं कि इस नए तोहफे के बाद बिहार के जिलों का क्या हाल है। सरकार का मानना है कि बिहार के लोग अब काफी अमीर हो चुके हैं, इसलिए यहाँ तेल की कीमतें हमेशा दिल्ली-मुंबई को टक्कर देती हैं। इस ताज़ा बढ़ोतरी के बाद आपके शहर का अंदाज़ा कुछ ऐसा है:
पटना (Patna) | ₹106.50 – ₹107.50 | ₹93.50 – ₹94.50 |
मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur)| ₹107.00+ | ₹94.0भागलपुर / गया (Gaya) | ₹107.50+ | ₹94.50+ |
दिल को बहलाने के लिए ख्याल अच्छा है:** गाड़ी में पेट्रोल डलवाते समय मीटर की तरफ न देखें। उसे एक ‘डिजिटल आर्ट’ समझें जो बहुत तेजी से आगे बढ़ती है। इससे मानसिक शांति मिलती है। जब भी दाम बढ़ते हैं, तो एक बड़ा ही इमोशनल ड्रामा सामने आता है—*”कंपनियां खून के आंसू रो रही हैं (OMCs are bleeding)!”* अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो गया है, कंपनियां घाटे में हैं, वगैरह-वगैरह। वैसे, आम आदमी पिछले कई सालों से बिना एनेस्थीसिया के ‘ब्लीड’ कर रहा है, लेकिन उसकी चिंता करने के लिए तो सिर्फ चुनाव के वक्त नेता जी आते हैं। बाकी समय तो जनता को आत्मनिर्भर बनकर चुपचाप अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। बिहार जैसे राज्य में जहाँ सरकार अक्सर ‘विशेष राज्य के दर्जे’ की मांग करती है, वहाँ जनता को ‘विशेष रूप से’ महंगाई की चक्की में पीसा जाता है। इस नए दाम के बाद क्या-क्या बदलने वाला है, ज़रा क्रोनोलॉजी समझिए: स्मार्ट किसान, महंगा डीजल: हमारे किसान भाई जो पहले ही मौसम की मार झेलते हैं, अब ट्रैक्टर और सिंचाई पंप चलाने के लिए ‘सोने के भाव’ वाला डीजल खरीदेंगे। आखिर डिजिटल इंडिया में किसान को भी तो ‘महंगा’ अनुभव मिलना चाहिए! सब्जी मंडी का वीआईपी ट्रीटमेंट: पटना की मीठापुर मंडी हो या मुजफ्फरपुर का बाजार, अब सब्जियां ऑटो और ट्रक से नहीं, बल्कि ‘शाही सवारी’ से आएंगी। जब किराया बढ़ेगा, तो आलू-प्याज भी खुद को काजू-किशमिश समझने लगेंगे। सेहत के लिए बढ़िया कदम: अगर ऐसे ही दाम बढ़ते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हम सब अपनी गाड़ियां गैराज में खड़ी करके पैदल या साइकिल से चलेंगे। धन्यवाद सरकार, हमारी सेहत का इतना ख्याल रखने के लिए!
एक हफ्ते में दो बार दाम बढ़ाकर सरकार ने यह साबित कर दिया है कि देश में सब कुछ ठहर सकता है, लेकिन महंगाई की तरक्की नहीं रुकनी चाहिए। पेट्रोल बहुत जल्द ₹110 का आंकड़ा छूने की तैयारी में है, ताकि हम गर्व से कह सकें कि हमारा पेट्रोल भी अब शतक के पार ‘सुपर स्ट्राइक रेट’ से चल रहा है। चलते-चलते एक सवाल: आपको क्या लगता है, अगली बढ़ोतरी इस हफ्ते के अंत तक होगी या सरकार हमें दो-चार दिन सांस लेने का मौका देगी?