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आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी महिलाएं, 51 लाख बहनों के बैंक खातों में पहुंचे ₹5000

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रांची : झारखंड की राजनीति और आम जनता के बीच से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की आधी आबादी को अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक तोहफा दे दिया है. सरकार की फ्लैगशिप योजना ‘झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ के तहत राज्य की करीब 51 लाख से अधिक लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में ₹5000 की सम्मान राशि सीधे ट्रांसफर (DBT) कर दी गई है. सरकार के इस महा-कदम के बाद पूरे राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों के बैंकों में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है और उत्सव का माहौल देखा जा रहा है.

दो चरणों में पूरा हुआ ‘ऑपरेशन ₹5000’, तकनीकी अड़चनों के बाद भी खाते में पहुंचे पैसे

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत पहले चरण में रांची, धनबाद, देवघर, बोकारो, जमशेदपुर, गुमला और दुमका सहित 12 जिलों की महिलाओं के खातों में पैसे भेजे गए थे. वहीं, बचे हुए शेष जिलों की महिलाओं का डेटा पूरी तरह सत्यापित करने के बाद दूसरे चरण की राशि भी सफलतापूर्वक ट्रांसफर कर दी गई है. कई महिलाओं के खातों में बैंक सर्वर और एनपीसीआई (NPCI) मैपिंग की वजह से शुरुआती दिक्कतें आई थीं, लेकिन मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद बैंकों ने विशेष कैंप लगाकर सभी तकनीकी खामियों को दूर किया और सीधे बहनों के खातों में कुल ₹5000 की एकमुश्त किस्त (पिछली बकाया किस्तों को जोड़कर) भेज दी गई.

कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ? ये हैं 4 मुख्य शर्तें

हेमंत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ लेने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग और महिला बाल विकास विभाग ने कड़े नियम तय किए हैं:

  1. उम्र की सीमा: आवेदन करने वाली महिला की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए.

  2. आय का दायरा: लाभार्थी महिला के परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए.

  3. सरकारी नौकरी पर रोक: परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए और न ही वह आयकर दाता (Taxpayer) होना चाहिए.

  4. चार पहिया वाहन न हो: परिवार के पास कोई निजी चार पहिया वाहन नहीं होना चाहिए (हालांकि, किसानों के ट्रैक्टर को इस नियम से बाहर रखा गया है).

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बड़ा बयान: “यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह हमारी माताओं और बहनों के आत्मसम्मान और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता की नई बुनियाद है. हमारी सरकार का लक्ष्य है कि झारखंड की एक भी गरीब बहन पैसों की कमी के कारण अपने बच्चों की शिक्षा या स्वास्थ्य से समझौता न करे. विपक्ष चाहे जितने भी आरोप लगाए, हमारी सरकार जनता के हक का पैसा सीधे उनके खातों में पहुंचाने का काम निरंतर जारी रखेगी.”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस योजना के जरिए सरकार ने राज्य के ग्रामीण वोट बैंक, खासकर महिलाओं के बीच अपनी पकड़ को अभूतपूर्व रूप से मजबूत कर लिया है. इधर, विपक्ष ने सरकार पर लोक-लुभावन योजनाओं के जरिए राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाया है, लेकिन लाभार्थियों के चेहरों की मुस्कान इस सियासी बहस पर भारी पड़ती दिख रही है.

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