बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई लगातार चर्चा में है। पिछले कुछ दिनों में पटना, सीवान और अन्य जिलों में पुलिस मुठभेड़ों की कई घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक नई सरकार ने अपराध नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता बनाया है और पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हाल के दिनों में कई बड़े अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई हुई है, जिससे राज्य की राजनीति और कानून व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई अपराधियों के मनोबल को तोड़ने के लिए जरूरी है। नई सरकार का साफ संदेश है कि कानून को चुनौती देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब अपराधी पुलिस टीम पर फायरिंग करते हैं या गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हैं, तब जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है। हालिया आंकड़ों में बताया गया है कि 2026 के शुरुआती महीनों में कई मुठभेड़ हुईं, जिनमें कई अपराधी घायल हुए और कुछ मारे गए। इससे पुलिस की सक्रियता साफ दिखाई देती है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ एनकाउंटर से अपराध पर पूरी तरह रोक लग जाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि एनकाउंटर अपराधियों में तत्काल डर जरूर पैदा कर सकता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अपराध रोकने के लिए मजबूत जांच व्यवस्था, त्वरित न्यायिक प्रक्रिया, बेहतर खुफिया तंत्र और सामाजिक सुधार की भी उतनी ही जरूरत होती है। अगर अपराध के पीछे बेरोजगारी, राजनीतिक संरक्षण और कमजोर प्रशासनिक पकड़ जैसे कारण बने रहेंगे, तो केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल होगा।विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। कुछ नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या एनकाउंटर कानून व्यवस्था का सही मॉडल है या यह न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। उनका कहना है कि अपराधियों को सजा अदालत के जरिए मिलनी चाहिए, न कि केवल पुलिस कार्रवाई के जरिए। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। दूसरी ओर आम लोगों का एक बड़ा वर्ग पुलिस की इस सख्ती का समर्थन कर रहा है। लोगों का कहना है कि अगर अपराधी खुलेआम वारदात करेंगे और पुलिस पर हमला करेंगे तो कठोर कार्रवाई जरूरी है। खासकर उन इलाकों में जहां लंबे समय से अपराध का असर रहा है, वहां लोग इसे राहत के तौर पर देख रहे हैं।कुल मिलाकर, नई सरकार की एनकाउंटर नीति से अपराधियों में डर जरूर पैदा हुआ है और इसका तात्कालिक असर भी दिख रहा है। लेकिन बिहार में अपराध पर स्थायी रोक तभी लगेगी जब पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ न्याय व्यवस्था को तेज, प्रशासन को पारदर्शी और समाज को सुरक्षित बनाने की दिशा में व्यापक सुधार किए जाएं। सिर्फ एनकाउंटर नहीं, बल्कि कानून के मजबूत राज से ही बिहार में अपराध पर पूरी तरह लगाम लग सकती है।