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बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी देश और मह‍िलाओं के बारे में क्‍या सोचती है?

बांग्लादेश में 12 फ़रवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में एक पार्टी, जो सालों तक सत्ता से दूर हाश‍िए पर रही, इस चुनाव में सियासी बातचीत के केंद्र में आ गई है.

यह पार्टी है, बांग्‍लादेश की जमात-ए-इस्लामी. यह एक इस्‍लामी राजनीत‍िक पार्टी है. इसे एक दशक से ज़्यादा वक़्त तक चुनाव लड़ने से रोका गया था.

अरसे तक इस देश के चुनाव में अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनल‍िस्‍ट पार्टी यानी बीएनपी ही मुख्‍य मुक़ाबले में रहती थीं. अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की सरकार सत्ता से बेदख़ल हो गई. उनकी पार्टी आवामी लीग पर पाबंदी लगा दी गई.

राजनीत‍िक व‍िश्‍लेषकों के मुताब‍िक़, इस बार बीएनपी के ख़िलाफ़ जमात-ए-इस्‍लामी मुख्य दावेदार बनकर उभरी है.

जमात-ए-इस्‍लामी कभी बीएनपी की सहयोगी भी रही थी. जमात के कुछ ख़ास सामाज‍िक-राजनीत‍िक-धार्म‍िक व‍िचार हैं. ख़ासकर देश के चर‍ित्र, मह‍िलाओं और अल्‍पसंख्‍यकों के बारे में. इसल‍िए जमात के उभार पर बांग्लादेश में ही नहीं, पड़ोसी भारत में भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में भी नज़र रखी जा रही है.

प‍िछले द‍िनों हम बांग्लादेश में थे. हम कई जगह गए और कई लोगों से बात की. हमने समझने की कोशिश की कि जमात-ए-इस्‍लामी कैसे काम करती है और बांग्लादेश के समाज के लिए उनका नज़र‍िया क्या है.

हम बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिम में शातखीरा ज़िले पहुँचे. यह इलाक़ा राजधानी ढाका से लगभग ढाई सौ क‍िलोमीटर दूर है और भारत के पश्चिम बंगाल राज्य से सटा हुआ है. यहाँ के शातखीरा-4 संसदीय चुनाव क्षेत्र को जमात-ए-इस्‍लामी का गढ़ माना जाता है.

हम यहाँ देखने गए थे क‍ि ढाका से दूर जमात के नेता और कार्यकर्ता ज़मीन पर क‍ि‍स नज़र‍िए के साथ काम कर रहे हैं.

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