नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है. देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने मंगलवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. 5 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ और बढ़ गया है.
महानगरों में उच्चतम स्तर पर पहुंचे रेट
इससे पहले पिछले हफ्ते शुक्रवार को तेल कंपनियों ने करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में सीधे 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी. मंगलवार को हुई ताजा वृद्धि के बाद महज 5 दिनों के भीतर देश में पेट्रोल-डीजल के रेट लगभग 3.90 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं. स्थानीय करों और वैट (VAT) की दरों में भिन्नता के कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में बढ़ोतरी का आंकड़ा 82 पैसे से 96 पैसे प्रति लीटर के बीच रहा है. इस संशोधन के बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹98.64 और डीजल ₹91.58, मुंबई में पेट्रोल ₹107.59 और डीजल ₹94.08, कोलकाता में पेट्रोल ₹109.70 और डीजल ₹96.07 तथा चेन्नई में पेट्रोल ₹104.49 और डीजल ₹96.11 प्रति लीटर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.
पश्चिम एशिया संकट और रूसी तेल पर छूट खत्म होना बनी मुख्य वजह
विशेषज्ञों और तेल कंपनियों के अनुसार, घरेलू बाजार में इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक स्तर पर हो रही उथल-पुथल जिम्मेदार है. ईरान और इजरायल के बीच चल रहे पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में व्यवधान की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत इस सप्ताह 112.10 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है. इसके साथ ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल पर भारत को मिलने वाली छूट का कुशन (सहारा) अब कमजोर पड़ गया है, जिससे आयात लागत में भारी इजाफा हुआ है. तेल कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें 110 डॉलर से ऊपर बनी रहीं तो आने वाले दिनों में किश्तों में ईंधन की कीमतों में और इजाफा देखा जा सकता है, जिसका सीधा और चौतरफा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा और फल, सब्जियां, दूध, राशन जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजें भी महंगी हो जाएंगी