हाजीपुर सदर अस्पताल में शुद्ध पेयजल की बर्बादी, भीषण गर्मी के बीच मरीजों को हो रही परेशानी

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अस्पताल में पीने वाले पानी की बर्बादी

 

Bihar News: Hajipur स्थित सदर अस्पताल में भीषण गर्मी के बीच शुद्ध पेयजल की बर्बादी का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जहां एक ओर जिले में तापमान लगातार बढ़ रहा है और लोग तेज गर्मी तथा हीट वेव से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल परिसर में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर शुद्ध पानी बहकर बर्बाद हो रहा है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर के मुख्य गेट के पास स्थित निबंधन काउंटर और दवा वितरण केंद्र के समीप लगाए गए वाटर एटीएम और ठंडा पानी उपलब्ध कराने वाले फ्रिज से लगातार पानी रिस रहा है। लीकेज की यह समस्या कई दिनों से बनी हुई बताई जा रही है, लेकिन अब तक इसे ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

अस्पताल के सबसे व्यस्त हिस्से में हो रही पानी की बर्बादी

जिस स्थान पर पानी का रिसाव हो रहा है, वह अस्पताल का सबसे व्यस्त क्षेत्र माना जाता है। यहीं मरीजों का पंजीकरण किया जाता है और बीपी, शुगर, हाइट तथा वजन जैसी प्राथमिक स्वास्थ्य जांचें भी होती हैं। इसके अलावा दवा वितरण काउंटर भी इसी परिसर में स्थित है, जहां दिनभर मरीजों और उनके परिजनों की भारी भीड़ लगी रहती है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर लगातार पानी बहने से न केवल पेयजल की बर्बादी हो रही है, बल्कि अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में जहां साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, वहां इस तरह की लापरवाही चिंता का विषय है।

42 डिग्री तापमान के बीच पानी की अहमियत

इन दिनों बिहार के कई जिलों की तरह Hajipur में भी भीषण गर्मी का असर देखा जा रहा है। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और दोपहर के समय गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। मौसम विभाग द्वारा हीट वेव को लेकर लगातार चेतावनी जारी की जा रही है। ऐसे में अस्पतालों में आने वाले मरीजों के लिए शुद्ध और ठंडे पेयजल की उपलब्धता बेहद जरूरी हो जाती है। गर्मी और उमस के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर, कमजोरी और लू जैसी समस्याओं के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में इस तरह पानी का लगातार बहना लोगों को परेशान कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां एक तरफ लोग एक-एक बूंद पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल में शुद्ध पानी की बर्बादी प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।

मरीजों और परिजनों को हो रही परेशानी

सदर अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई मरीज दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आते हैं, जहां पहले से ही पेयजल संकट की स्थिति बनी रहती है। अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में पानी सबसे बड़ी जरूरत बन जाता है। अस्पताल में मौजूद वाटर एटीएम और ठंडा पानी की सुविधा लोगों के लिए राहत का माध्यम होनी चाहिए, लेकिन रिसाव के कारण स्थिति उलट होती दिख रही है। कुछ लोगों का कहना है कि कई बार पानी लेने पहुंचने पर मशीन के आसपास गंदगी और पानी जमा होने के कारण वहां खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जलजमाव से बढ़ा हादसे का खतरा

लगातार पानी रिसने के कारण निबंधन काउंटर के आसपास फिसलन और जलजमाव की स्थिति बन गई है। इससे मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवाजाही मुश्किल हो गई है। अस्पताल में आने वाले लोगों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले इलाके में पानी जमा रहने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। खासकर बुजुर्ग मरीज, गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे फिसलकर घायल हो सकते हैं। इसके अलावा पानी जमा रहने से गंदगी और बदबू की समस्या भी पैदा हो रही है। कुछ लोगों ने चिंता जताई कि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने पर मच्छरों और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते वाटर एटीएम और फ्रिज की मरम्मत कर दी जाती, तो इतनी बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद नहीं होता। स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि रिसाव की समस्या को तत्काल ठीक कराया जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही परिसर में नियमित साफ-सफाई और निगरानी की भी आवश्यकता बताई गई है।

पानी संरक्षण को लेकर जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी और जल संकट के दौर में पानी संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। सरकारी संस्थानों को इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर पानी की बर्बादी न केवल संसाधनों की क्षति है, बल्कि यह आम लोगों के बीच गलत संदेश भी देती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में पानी की हर बूंद कीमती है और सार्वजनिक संस्थानों में जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

अस्पताल आने वाले मरीजों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में अस्पताल में बेहतर पेयजल व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि वाटर एटीएम और फ्रिज की तकनीकी जांच कराकर लीकेज को तुरंत बंद किया जाए। साथ ही अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और जल निकासी व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को ऐसी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके।

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