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जातिवाद आज भी समाज के लिए एक ज़हर

भारत एक ऐसा देश है जहाँ अनेकता में एकता है। यहां अलग-अलग भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराओं के होने के बावजूद हम सब एक साथ रहते हैं। लेकिन इस पर एक काला धब्बा भी है – जातिवाद। आज हमारे देश की आजादी के 79 साल बाद भी जातिवाद हमारे समाज के लिए एक ऐसा ज़हर बना हुआ है, जो धीरे-धीरे लोगों के बीच नफरत और भेदभाव फैलाता है।हमारे समाज में इंसान को उसकी योग्यता से नहीं, बल्कि ज्यादातर उसकी जाति से पहचान होती है। यह सोच बहुत पुरानी है, लेकिन अफसोस की बात है कि आज के समय में भी यह खत्म नहीं हुई है। गाँव हो या शहर, पढ़े-लिखे लोग हों या अनपढ़ कहीं न कहीं जाति के आधार पर भेदभाव देखने को मिल ही जाता है।आज भी कई जगहों पर लोगों को सिर्फ उनकी जाति के कारण छोटे काम दिए जाते हैं या उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है। स्कूलों में बच्चों के बीच, नौकरी में, शादी-विवाह में हर जगह जाति एक बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। इससे समाज में बराबरी का भाव खत्म होता है और लोगों के मन में हीन भावना और गुस्सा पैदा होता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि जातिवाद के कारण समाज के साथ साथ देश के विकास में भी बाधा पहुंचाता है। जब हम किसी को उसकी जाति के आधार देखते हैं, तो हम उसकी प्रतिभा और मेहनत को नजरअंदाज कर देते हैं। इससे देश की विकास धीमी हो जाती है।जातिवाद का जहर सिर्फ भेदभाव तक सीमित नहीं है बल्कि यह समाज में हिंसा और नफरत को भी जन्म देता है। कई बार छोटी-छोटी बातों पर जाति के नाम पर बड़े-बड़े झगड़े हो जाते हैं, जो समाज की शांति को बिगाड़ देते हैं।अब सवाल यह है कि इस समस्या का समाधान क्या है? सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी। हमें यह समझना होगा कि हर इंसान बराबर है, उसकी पहचान उसकी मेहनत और उसके गुणों से होनी चाहिए, न कि उसकी जाति से। शिक्षा इस दिशा में सबसे बड़ा हथियार है। जब लोग जागरूक होंगे, तभी जातिवाद खत्म होगा।
परिवार और समाज को भी बच्चों को शुरू से ही समानता और भाईचारे की शिक्षा देनी चाहिए। सरकार को भी सख्त कानूनों के जरिए जातीय भेदभाव को रोकने के लिए काम करना चाहिए।नहीं तो जातिवाद एक ऐसा ज़हर है, जो समाज को अंदर से खोखला कर रहा है। अगर हमें एक मजबूत और विकसित भारत बनाना है, तो इस ज़हर को जड़ से खत्म करना होगा। तभी हम सच में सबका साथ, सबका विकास” का सपना पूरा कर पाएंगे।

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