
Bihar में नगर निकायों के कामकाज को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने लंबे समय से लंबित सशक्त स्थायी समिति के चुनाव की नई तारीखों की घोषणा कर दी है। विभाग की ओर से राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश जारी किया गया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में 26 मई से 31 मई के बीच हर हाल में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव पूरा कराया जाए।
इस फैसले की जानकारी नगर विकास मंत्री Nitish Mishra ने मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि समय पर सशक्त स्थायी समिति का गठन होने से नगर निकायों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।
नगर निकायों में क्यों महत्वपूर्ण है सशक्त स्थायी समिति
सशक्त स्थायी समिति नगर निकायों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में विकास योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय निर्णय, प्रशासनिक कार्य और कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर अंतिम निर्णय इसी समिति के माध्यम से लिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समिति समय पर गठित नहीं होती है तो विकास योजनाओं की प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई जरूरी कार्य लंबित रह जाते हैं। इसी वजह से राज्य सरकार इस चुनाव को जल्द पूरा कराने पर जोर दे रही है।
नियमों में बदलाव, मेयर और मुख्य पार्षदों के अधिकार सीमित
इस बार सरकार ने चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव भी किया है। पहले की व्यवस्था में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चयन सीधे तौर पर नगर निगमों के महापौर (मेयर) या नगर निकायों के मुख्य पार्षद द्वारा किया जाता था।
पुरानी व्यवस्था को लेकर लगातार आरोप लगते रहे कि मेयर और मुख्य पार्षद अपनी पसंद के लोगों को समिति में शामिल करते हैं। कई बार विकास योजनाओं, ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रशासनिक फैसलों में पक्षपात तथा मनमानी के आरोप भी सामने आते थे।
इन विवादों और पार्षदों के बीच बढ़ते असंतोष को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए चयन की शक्ति सीधे जनता द्वारा चुने गए वार्ड पार्षदों को सौंप दी है।
अब सीक्रेट बैलेट से होगा चुनाव
नई व्यवस्था के तहत अब सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव सीक्रेट बैलेट यानी गुप्त मतदान के माध्यम से कराया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया संबंधित जिले के डीएम की निगरानी में होगी।
सरकार का मानना है कि गुप्त मतदान से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और किसी प्रकार के दबाव या पक्षपात की संभावना कम होगी।
नगर विकास विभाग के अनुसार इस व्यवस्था से वार्ड पार्षदों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर मिलेगा और समिति में योग्य प्रतिनिधियों का चयन हो सकेगा।
पहले अप्रैल में होना था चुनाव
राज्य सरकार ने इससे पहले अप्रैल महीने में ही सशक्त स्थायी समिति के चुनाव कराने की तैयारी कर ली थी। विभाग ने 15 अप्रैल से 25 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम तय किया था।
उस समय सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए थे और प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। हालांकि बाद में कुछ तकनीकी और अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया था।
चुनाव टलने के बाद कई नगर निकायों में विकास कार्यों पर असर पड़ने की चर्चा भी सामने आई थी। अब सरकार ने नई तारीखों के साथ इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
डीएम को दिए गए विशेष निर्देश
नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि सरकार अब इस चुनाव को तय समयसीमा के भीतर पूरा कराना चाहती है। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने जिला प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
इसके अलावा मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रशासनिक निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
विकास कार्यों को मिलेगी गति
विशेषज्ञों का मानना है कि सशक्त स्थायी समिति के गठन से नगर निकायों में विकास योजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य शहरी सुविधाओं से जुड़े कई प्रोजेक्ट लंबे समय से समिति के गठन का इंतजार कर रहे थे।
नई समिति बनने के बाद बजट स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आने की उम्मीद है। इससे शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
राज्य सरकार इस बदलाव को नगर निकायों में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।
सरकार का कहना है कि अब समिति गठन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और सभी वार्ड पार्षदों को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय निकायों में जवाबदेही बढ़ेगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार आने की उम्मीद है।
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव नगर निकायों की कार्यप्रणाली में संतुलन लाने और विवाद कम करने में मददगार साबित हो सकता है।