दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश — India और China — अब सिर्फ सीमा या व्यापार को लेकर ही नहीं, बल्कि Technology और Manufacturing के क्षेत्र में भी एक नई प्रतिस्पर्धा में उतर चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से भारत ने “Make in India” और डिजिटल विकास पर जोर दिया है, उसने वैश्विक बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वहीं चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा manufacturing hub माना जाता रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आने वाले समय में Technology और Manufacturing की इस जंग में कौन आगे निकलेगा?
चीन ने पिछले दो दशकों में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त पकड़ बनाई है। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स का निर्माण चीन में करती रही हैं क्योंकि वहां मजबूत infrastructure, तेज production system और कम लागत वाली supply chain मौजूद है। Huawei, Xiaomi और BYD जैसी कंपनियों ने चीन को टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई पहचान दिलाई है।
दूसरी तरफ भारत भी तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। भारत सरकार की “Make in India”, “Digital India” और PLI Scheme जैसी योजनाओं ने विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया है। अब कई बड़ी टेक कंपनियां भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स का निर्माण कर रही हैं। Apple के iPhone की assembling अब भारत में भी बड़े स्तर पर होने लगी है। इसके अलावा Samsung और कई अन्य कंपनियां भारत में manufacturing units बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल manufacturing ecosystem है, जबकि भारत की ताकत उसकी युवा आबादी और तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार है। भारत में skilled workers और startups की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज Artificial Intelligence, Software Development और Digital Services के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की मांग पूरी दुनिया में है।
हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। चीन के मुकाबले भारत को अभी infrastructure, logistics और advanced semiconductor manufacturing जैसे क्षेत्रों में काफी
काम करना होगा। कई विदेशी निवेशक अब “China Plus One” strategy अपना रहे हैं, यानी वे चीन के साथ-साथ भारत जैसे देशों में भी निवेश बढ़ा रहे हैं ताकि supply chain पर एक ही देश की निर्भरता कम हो सके।
आने वाले वर्षों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। Experts का मानना है कि अगर भारत infrastructure, education और technology innovation पर लगातार निवेश करता रहा, तो वह दुनिया के बड़े manufacturing hubs में अपनी मजबूत जगह बना सकता है। वहीं चीन अपनी पुरानी बढ़त बनाए रखने के लिए नई तकनीकों और automation पर तेजी से काम कर रहा है।
Technology और Manufacturing की यह नई जंग केवल दो देशों की प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय की वैश्विक आर्थिक ताकत तय करने वाली लड़ाई भी बनती जा रही है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या भारत चीन को चुनौती देकर नया global manufacturing powerhouse बन पाएगा या फिर चीन अपनी बादशाहत बरकरार रखेगा।