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पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका और आम जनता

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें हमेशा आम जनता के लिए चिंता का विषय रहती हैं। हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। यदि पेट्रोल-डीजल महंगे होते हैं, तो इसका असर केवल…

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हीटवेव और बदलता मौसम: बढ़ती चिंता

देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और दोपहर में घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। बदलते मौसम का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि…

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ईरान-इजरायल तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। भारत जैसे देशों के…

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हिंसक होते बच्चे: आखिर जिम्मेदार कौन—समाज या हम ?

  आज के समय में बच्चों में बढ़ती हिंसा केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि हमारी बदलती जीवनशैली का सीधा परिणाम है। हम अक्सर इस मुद्दे पर चर्चा करते समय सरकार, शिक्षा प्रणाली, मोबाइल या टीवी को दोष देते हैं, लेकिन शायद ही कभी हम अपने भीतर झांककर असली कारण समझने की कोशिश करते हैं।…

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detailed analytical article on the ethics, credibility and challenges of digital journalism age Artificial Intelligence

डिजिटल पत्रकारिता और एआई (AI): तकनीकी क्रांति के बीच नैतिक सिद्धांतों का संरक्षण

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने डिजिटल पत्रकारिता के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। ऑटोमेटेड न्यूज राइटिंग (Automated Journalism), प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, और एआई-संचालित एल्गोरिदम के कारण आज खबरें पलक झपकते ही पाठकों तक पहुंच रही हैं। ब्लूमबर्ग का ‘साइबॉर्ग’ (Cyborg) और वॉशिंगटन पोस्ट का ‘हेलीओग्राफ’ (Heliograf) जैसे टूल्स इस बात के प्रमाण हैं कि…

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Indira Gandhi's journey from a 'dumb doll' to the 'Iron Lady' of world politics, her greatest victories

आयरन लेडी: इंदिरा गांधी के राजनीतिक सफर की दास्तां

आयरन लेडी: इंदिरा गांधी आधुनिक विश्व इतिहास के सबसे शक्तिशाली, प्रभावशाली और विवादास्पद चेहरों में से एक हैं। भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री के रूप में, उन्होंने देश के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। अपने दृढ़ संकल्प के कारण “आयरन लेडी” (लौह महिला) के नाम से जानी जाने…

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पत्रकारिता: सच दिखाने का माध्यम… या TRP की दौड़?

लोकतंत्र में पत्रकारिता और मीडिया को समाज का “चौथा स्तंभ” कहा जाता है। जिस तरह विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका देश को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उसी तरह मीडिया भी जनता और सरकार के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करता है। मीडिया का काम सिर्फ खबरें दिखाना नहीं होता, बल्कि सच को सामने…

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AI: इंसानों का भविष्य… या नौकरियों का दुश्मन?

कुछ साल पहले तक Artificial Intelligence यानी Artificial Intelligence सिर्फ फिल्मों और कल्पनाओं का हिस्सा लगता था। लोग सोचते थे कि मशीनें इंसानों की तरह सोचेंगी, बात करेंगी और फैसले लेंगी—ये सब सिर्फ science fiction है। लेकिन आज AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। मोबाइल के voice assistants, chatbots, online recommendations, facial recognition,…

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मोबाइल एडिक्शन और मेंटल हेल्थ: एक बढ़ती हुई समस्या

आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, काम, मनोरंजन और दोस्तों से जुड़े रहने के लिए हम हर दिन कई घंटे मोबाइल पर बिताते हैं। लेकिन जब यही आदत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तब यह “मोबाइल एडिक्शन” बन जाती है, जो हमारी मानसिक सेहत पर…

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सोशल मीडिया: जहाँ लोग जुड़े भी हैं… और सबसे ज्यादा अकेले भी

आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही लोग सबसे पहले मोबाइल चेक करते हैं और रात में सोने से पहले आखिरी बार भी स्क्रीन ही देखते हैं। Facebook, Instagram, X, Snapchat और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म ने लोगों के…

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