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Rishabh Jha

दुर्गा भाभी: वह क्रांतिकारी नायिका जिसे इतिहास ने उतना याद नहीं किया जितना करना चाहिए था

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अक्सर पुरुष क्रांतिकारियों के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुखदेव जैसे नाम इतिहास की किताबों में बड़े अक्षरों में लिखे गए, लेकिन उन्हीं पन्नों में एक महिला का योगदान धीरे-धीरे धुंधला कर दिया गया — दुर्गा भाभी। उनका असली नाम दुर्गा देवी वोहरा था, लेकिन…

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कैप्टन हनीफ उद्दीन: कारगिल की बर्फीली चोटियों पर अमर हुई एक वीरगाथा

कारगिल युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास का वह अध्याय है जिसमें साहस, त्याग और देशभक्ति की अनगिनत कहानियां दर्ज हैं। उन्हीं कहानियों में एक नाम ऐसा भी है जो आज भी बर्फीली चोटियों के साथ गूंजता है — कैप्टन हनीफ उद्दीन। वह सिर्फ एक सैनिक नहीं थे, बल्कि उस भारत की तस्वीर थे जहां धर्म से…

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भारतीय फुटबॉल की स्वर्णिम तिकड़ी: जब पूरे एशिया में गूंजता था भारत का नाम

आज भारतीय फुटबॉल संघर्ष, संभावनाओं और अधूरे सपनों की कहानी लगता है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब एशिया में भारतीय फुटबॉल का नाम सम्मान के साथ लिया जाता था। वह दौर 1950 और 60 के दशक का था, जिसे भारतीय फुटबॉल का “स्वर्णिम युग” कहा जाता है। इसी दौर में तीन महान खिलाड़ियों…

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रामगोपाल वर्मा: वह फिल्मकार जिसने भारतीय सिनेमा में असली अभिनय वापस लाया

भारतीय सिनेमा में एक लंबा दौर ऐसा रहा जब अभिनय का मतलब ऊंची आवाज, नाटकीय संवाद और बड़े-बड़े हावभाव माना जाता था। हीरो गुस्से में चिल्लाता था, विलेन जोर से हंसता था और भावनाएं वास्तविक जीवन से ज्यादा रंगमंच जैसी लगती थीं। लेकिन 1990 के दशक में एक फिल्मकार आया जिसने अभिनय की पूरी भाषा…

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अज्ज़ूरी का पतन: 2006 विश्व कप जीतने के बाद कैसे बिखर गई इटली की महान फुटबॉल विरासत

2006 का फुटबॉल विश्व कप इटली के लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं था, बल्कि गौरव, अनुशासन और फुटबॉल की महान परंपरा का उत्सव था। बर्लिन के स्टेडियम में जब इटली ने फ्रांस को हराकर विश्व कप जीता, तब पूरी दुनिया ने माना कि अज्ज़ूरी यानी इटली की राष्ट्रीय टीम अब भी फुटबॉल की सबसे बड़ी…

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कैसे वामपंथ ने अपना ही बंगाल खो दिया: एक राजनीतिक साम्राज्य के धीरे-धीरे ढहने की कहानी

एक समय था जब पश्चिम बंगाल का नाम लेते ही “लाल सलाम” की गूंज सुनाई देती थी। कॉलेज कैंपसों से लेकर मजदूर यूनियनों तक, साहित्य से लेकर थिएटर तक, वामपंथ सिर्फ एक राजनीतिक विचारधारा नहीं था बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान बन चुका था। 1977 से 2011 तक लगातार 34 वर्षों तक सत्ता में रहना…

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ऑपरेशन रॉथ ऑफ गॉड: बदले, जासूसी और छाया युद्ध की सबसे चर्चित कहानी

1972 का म्यूनिख ओलंपिक दुनिया के लिए खेल, शांति और अंतरराष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना जा रहा था। लेकिन अचानक गोलियों की आवाज ने इस उत्सव को भय और रक्तपात में बदल दिया। फ़िलिस्तीनी उग्रवादी संगठन “ब्लैक सितंबर” ने इज़राइली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया। जर्मन सुरक्षा एजेंसियों का रेस्क्यू ऑपरेशन विफल रहा और अंततः…

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फ्रांसिस फोर्ड कोपोला और मारियो पूजो: “द गॉडफादर” के पीछे छिपा रचनात्मक संघर्ष

“द गॉडफादर” को आज दुनिया की महानतम फिल्मों में गिना जाता है, लेकिन इस महान कृति के पीछे सिर्फ कला नहीं, बल्कि गहरा रचनात्मक संघर्ष भी छिपा हुआ था। फ्रांसिस फोर्ड कोपोला और मारियो पूजो दोनों ही असाधारण प्रतिभा के लोग थे, लेकिन दोनों सिनेमा और कहानी को अलग नजरिए से देखते थे। यही कारण…

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ए.एफ.एस. टाल्यारखान: वह आवाज जिसने भारत में क्रिकेट को सुनने की संस्कृति दी

आज क्रिकेट कमेंट्री हाईटेक स्टूडियो, दर्जनों कैमरों और विशेषज्ञ पैनलों के बीच होती है। दर्शक हर गेंद को अलग-अलग एंगल से देख सकते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब भारत में करोड़ों लोग सिर्फ एक आवाज के सहारे मैच महसूस करते थे। वह आवाज थी — ए.एफ.एस. टाल्यारखान की। उन्हें भारतीय क्रिकेट कमेंट्री…

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जब प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया जासूसी का जाल: भारत का चर्चित “कूमर नारायण स्पाई कांड”

1980 का दशक भारत के लिए राजनीतिक बदलावों, वैश्विक तनाव और संवेदनशील रक्षा नीतियों का दौर था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। भारत तकनीकी आधुनिकता और नई विदेश नीति की ओर बढ़ रहा था। लेकिन इसी दौर में देश की सत्ता के सबसे सुरक्षित गलियारों…

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