ढाका यूनिवर्सिटी की दीवारों पर एक बार फिर हलचल बढ़ गई.
दीवारों और गलियारों में फैली ग़ुस्से, चुटीली और शायराना ग्रैफ़िटी जेन ज़ी के नेतृत्व वाले जुलाई 2024 के उस आंदोलन की गूंज है, जिसने 15 साल सत्ता में रहीं शेख़ हसीना को अपदस्थ कर दिया था.
कभी बांग्लादेश की लोकतंत्र समर्थक की प्रतीक रहीं हसीना को लेकर आलोचकों का कहना है कि वह समय के साथ ज़्यादा तानाशाह होती चली गईं थीं. इस्तीफ़ा देने के बाद वह भारत चली गईं.
यूनिवर्सिटी में छात्र छोटे-छोटे समूहों में खड़े होकर राजनीति पर बहस करते दिखते हैं. एक बेतरतीब घास वाले मैदान में, ऊपर झूल रहीं लाल लालटेनें चीनी नववर्ष उत्सव का संकेत दे रही हैं.

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